अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है:
“मेरे बन्दों में कम ही शुक्रगुज़ार हैं।”
— (सूरह सबा : 34:13)
यह आयत इंसान को एक बहुत बड़ी सच्चाई याद दिलाती है कि दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो सच में अल्लाह की नेमतों की कदर करते हैं और उसका शुक्र अदा करते हैं। इंसान की जिंदगी अनगिनत नेमतों से भरी हुई है, लेकिन अक्सर वह उन नेमतों को सामान्य समझकर भूल जाता है।
अल्लाह ने इंसान को:
🔸जान दी
🔸सेहत दी
🔸आंखें दी
🔸परिवार दिया
🔸रोज़ी दी
🔸और अनगिनत रहमतें दीं।
लेकिन इंसान कई बार सिर्फ अपनी परेशानियों को देखता है और नेमतों को भूल जाता है। इसलिए इस्लाम में शुक्रगुज़ारी को बहुत बड़ी इबादत बताया गया है।
शुक्रगुज़ारी क्या है?
शुक्रगुज़ारी सिर्फ “अल्हम्दुलिल्लाह” कह देने का नाम नहीं,
बल्कि दिल से यह मानना है कि:
हर नेमत अल्लाह की तरफ से है
और हमें उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए।
जब इंसान:
♥️ खुशी में अल्लाह को याद करे
♥️ नेमत मिलने पर घमंड न करे
♥️ और हर हाल में अपने रब का शुक्र अदा करे
तो यही असली शुक्रगुज़ारी है।
इंसान नेमतों को भूल जाता है
अगर इंसान अपनी जिंदगी पर गौर करे, तो उसे महसूस होगा कि हर पल वह अल्लाह की रहमतों में जी रहा है।
सोचिए:
अगर आंखों की रोशनी चली जाए
सांस रुक जाए
या सेहत खराब हो जाए
तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाएगी।
लेकिन जब इंसान को ये नेमतें लगातार मिलती रहती हैं, तो वह उनकी कदर करना छोड़ देता है।
इसीलिए अल्लाह ने फरमाया कि बहुत कम लोग सच्चे शुक्रगुज़ार होते हैं।
शुक्रगुज़ारी से नेमतें बढ़ती हैं
.
क़ुरआन में अल्लाह ने वादा किया है:
“अगर तुम शुक्र करोगे, तो मैं तुम्हें और ज्यादा दूँगा।”
जब इंसान अल्लाह की दी हुई चीजों की कदर करता है, तो अल्लाह उसकी जिंदगी में बरकत बढ़ा देता है।
शुक्रगुज़ार इंसान:
🔸ज्यादा सुकून में रहता है
🔹कम शिकायत करता है
🔸और दूसरों से ज्यादा खुश रहता है।
शिकायत नहीं, शुक्र करना सीखें
आज बहुत लोग:
अपनी परेशानियों
कमी
और दूसरों से तुलना
में इतने उलझ जाते हैं कि वे अपनी नेमतों को भूल जाते हैं।
कई लोग सोचते हैं:
“मेरे पास यह नहीं है”
“मेरी जिंदगी अच्छी नहीं”
लेकिन वे यह नहीं देखते कि अल्लाह ने उन्हें कितनी चीजें दी हैं जो लाखों लोगों के पास नहीं।.
अगर इंसान सिर्फ यह सोच ले कि:
उसे चलने की ताकत मिली
खाने को मिला
परिवार मिला
और ईमान मिला
तो वह शुक्र से भर जाएगा।
शुक्रगुज़ार बंदा अल्लाह को पसंद है
अल्लाह को वह बंदा बहुत पसंद है जो:
छोटी-बड़ी हर नेमत पर शुक्र करे
घमंड से बचे
और हर हाल में अपने रब को याद रखे।
हज़रत मुहम्मद ﷺ खुद भी हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा किया करते थे।
यहाँ तक कि जब उन्हें कोई खुशी मिलती, तो वे कहते:
“अल्हम्दुलिल्लाह”
और मुश्किल में भी सब्र और शुक्र के साथ रहते।
शुक्रगुज़ारी सिर्फ ज़बान से नहीं
असल शुक्रगुज़ारी यह है कि इंसान:
अल्लाह की नेमतों का गलत इस्तेमाल न करे
गुनाहों से बचे
और अपने जीवन को अल्लाह की पसंद के अनुसार बनाए।
अगर किसी को:
धन मिला है
ज्ञान मिला है
या ताकत मिली है
तो उसे चाहिए कि वह उसे अच्छाई और इंसानियत के कामों में लगाए।
आज के दौर में शुक्र की जरूरत
आज सोशल मीडिया और दिखावे के दौर में लोग दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी जिंदगी से असंतुष्ट हो जाते हैं।
वे:
दूसरों की दौलत देखते हैं
उनकी खुशियाँ देखते हैं
और खुद को दुखी समझने लगते हैं।
लेकिन शुक्रगुज़ार इंसान जानता है कि: अल्लाह ने हर इंसान को अलग नेमतें दी हैं।
जो इंसान शुक्र करना सीख लेता है, उसका दिल सुकून से भर जाता है।
मुसीबत में भी शुक्र
सच्चा मोमिन सिर्फ खुशी में नहीं, बल्कि मुश्किल में भी अल्लाह पर भरोसा रखता है।
कई बार इंसान किसी परेशानी को बुरा समझता है, लेकिन वही चीज़ उसके लिए भलाई बन जाती है।
इसलिए हर हाल में:
सब्र
और शुक्र
मोमिन की पहचान है।
बच्चों को शुक्र सिखाएँ
हर घर में बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि:
खाने पर अल्हम्दुलिल्लाह कहें
छोटी चीजों की कदर करें
और शिकायत कम करें।
अगर बचपन से शुक्र की आदत पड़ जाए, तो इंसान बड़ा होकर भी विनम्र और खुशदिल रहता है।
शुक्रगुज़ारी दिल को अमीर बनाती है
असल अमीरी सिर्फ पैसे से नहीं होती।
जिस इंसान के दिल में शुक्र हो, वही असली अमीर है।
कई अमीर लोग भी बेचैन रहते हैं, जबकि कई साधारण लोग शुक्र की वजह से सुकून भरी जिंदगी जीते हैं।
निष्कर्ष
सूरह सबा की यह आयत इंसान को याद दिलाती है कि सच्चे शुक्रगुज़ार बंदे बहुत कम होते हैं। क़ुरआन हमें सिखाता है कि हर नेमत अल्लाह की तरफ से है और उसका शुक्र अदा करना हमारी जिम्मेदारी है।
इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि:
🙏 छोटी-बड़ी हर नेमत की कदर करे
🙏 शिकायत से बचे
🙏 और हर हाल में “अल्हम्दुलिल्लाह” कहने की आदत बनाए।
🤲 अल्लाह हमें सच्चा शुक्रगुज़ार बंदा बनने, अपनी नेमतों की कदर करने और हर हाल में अपने रब का शुक्र अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
0 Response to "शुक्रगुज़ारी — अल्लाह की पसंदीदा आदत"
Post a Comment