अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है:
“क्यों नहीं? हम तो उसकी उंगलियों की पोर-पोर तक ठीक बना देने पर क़ादिर हैं।”
— (सूरह अल-क़ियामह : 75:4)
यह आयत इंसान को अल्लाह की महान ताकत और क़यामत के दिन दोबारा ज़िंदा किए जाने की सच्चाई याद दिलाती है। कुछ लोग यह सोचते थे कि जब इंसान मरकर मिट्टी बन जाएगा, उसकी हड्डियाँ बिखर जाएँगी, तो उसे दोबारा कैसे ज़िंदा किया जाएगा?
अल्लाह इस आयत में जवाब देता है कि जिसने इंसान को पहली बार पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना बिल्कुल मुश्किल नहीं। बल्कि अल्लाह तो इंसान की उंगलियों की पोर-पोर तक पहले जैसी बना देने पर पूरी तरह क़ादिर है।
अल्लाह की कुदरत की निशानी
इंसान का शरीर बहुत अद्भुत तरीके से बनाया गया है।
हर इंसान की:
🔹शक्ल
🔹आवाज़
🔹आंखें
और यहां तक कि उंगलियों के निशान भी अलग होते हैं।
आज विज्ञान भी मानता है कि दुनिया में दो लोगों के फिंगरप्रिंट बिल्कुल एक जैसे नहीं होते।
सोचिए, जिस अल्लाह ने इतनी बारीकी और खूबसूरती से इंसान को बनाया है, क्या उसके लिए दोबारा पैदा करना मुश्किल हो सकता है?
यह आयत इंसान को अल्लाह की अनंत शक्ति पर यकीन दिलाती है।
क़यामत का दिन सच्चाई है
इस्लाम सिखाता है कि एक दिन पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी।
फिर अल्लाह सभी इंसानों को दोबारा ज़िंदा करेगा ताकि उनके कर्मों का हिसाब लिया जाए।
जो लोग दुनिया में:
🔸अच्छे काम करेंगे
🔸अल्लाह की इबादत करेंगे
🔸और इंसानियत के साथ भलाई करेंगे
उन्हें जन्नत मिलेगी।
और जो लोग:
🔹गुनाहों में डूबे रहेंगे
🔹अल्लाह को भूल जाएंगे
🔹और दूसरों पर ज़ुल्म करेंगे
उन्हें अपने कर्मों का जवाब देना होगा।
इंसान की कमजोरी और अल्लाह की ताकत
इंसान खुद बहुत कमजोर है।
वह:
अपने दिल की धड़कन को कंट्रोल नहीं कर सकता
मौत को रोक नहीं सकता
और अपने शरीर को हमेशा जवान नहीं रख सकता।
लेकिन अल्लाह:
✳️हर चीज़ पर क़ादिर है
✳️वही पैदा करता है
✳️वही मौत देता है
✳️और वही दोबारा ज़िंदा करेगा।
यह आयत इंसान के घमंड को तोड़ती है और उसे उसके रब की महानता याद दिलाती है।
उंगलियों की पोरों का ज़िक्र क्यों?
इस आयत में खास तौर पर “उंगलियों की पोरों” का ज़िक्र बहुत गहरी बात बताता है।
अरब के लोग उस समय यह नहीं जानते थे कि हर इंसान के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं। लेकिन अल्लाह ने सदियों पहले बता दिया कि वह इंसान को इतनी बारीकी से दोबारा बनाएगा कि उसकी उंगलियों तक को वैसा ही कर देगा।
यह क़ुरआन की सच्चाई और अल्लाह के इल्म की बड़ी निशानी है।
आखिरत की तैयारी जरूरी है
जब इंसान को यह यकीन हो जाए कि:
🔹एक दिन उसे दोबारा ज़िंदा किया जाएगा
🔹और अपने हर काम का हिसाब देना होगा
तो उसकी जिंदगी बदलने लगती है।
वह:
गुनाहों से बचने की कोशिश करता है
लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करता है
और अल्लाह की इबादत में ध्यान देता है।
आखिरत की याद इंसान को जिम्मेदार बनाती है।
दुनिया हमेशा रहने की जगह नहीं
आज लोग:
🔹धन
🔸शोहरत
🔹और दुनियावी सुखों
में इतने खो जाते हैं कि आखिरत को भूल जाते हैं।
लेकिन यह दुनिया अस्थायी है।
एक दिन:
✳️सब कुछ खत्म हो जाएगा
✳️इंसान अपनी कब्र में होगा
✳️और फिर अल्लाह के सामने पेश किया जाएगा।
इसलिए समझदार इंसान वही है जो दुनिया के साथ-साथ आखिरत की भी तैयारी करे।
विज्ञान और क़ुरआन
आज विज्ञान जिन बातों को खोज रहा है, क़ुरआन ने सदियों पहले उनकी तरफ इशारा कर दिया था।
फिंगरप्रिंट की यूनिक पहचान आज अपराध जांच और पहचान का बड़ा आधार है।
लेकिन यह बात उस दौर में किसी इंसान को मालूम नहीं थी।
यह क़ुरआन की सच्चाई और अल्लाह के इल्म का एक चमत्कार है।
अल्लाह की रहमत का मौका
क़यामत और हिसाब की बातें सिर्फ डराने के लिए नहीं हैं।
अल्लाह इंसान को मौका देता है कि वह:
🔸तौबा करे
🔹अपनी जिंदगी सुधारे
🔸और नेक रास्ता अपनाए।
जब तक इंसान जिंदा है, उसके लिए अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुले हैं।
हर इंसान को सोचना चाहिए
यह आयत इंसान को सोचने पर मजबूर करती है:
🔹मैं किस मकसद से पैदा किया गया हूँ?
🔸क्या मैं अपने रब की बात मान रहा हूँ?
🔹और क्या मैं आखिरत की तैयारी कर रहा हूँ?
जो इंसान इन सवालों पर सोचता है, उसकी जिंदगी सही दिशा में जाने लगती है।
निष्कर्ष
सूरह अल-क़ियामह की यह आयत अल्लाह की महान शक्ति और क़यामत की सच्चाई का स्पष्ट प्रमाण है। क़ुरआन हमें सिखाता है कि अल्लाह इंसान को उसकी उंगलियों की पोर-पोर तक दोबारा पैदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है।
इसलिए हर इंसान को चाहिए कि:
♥️ अल्लाह की ताकत पर यकीन रखे
♥️ आखिरत की तैयारी करे
♥️ और अपनी जिंदगी को नेक अमलों से सजाए।
🤲 अल्लाह हमें अपनी कुदरत की निशानियों को समझने, आखिरत की तैयारी करने और नेक रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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