बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम 🤍
अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की नाफरमानी इंसान को गुमराही की तरफ ले जाती है। इसी बारे में क़ुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है:
“किसी मोमिन मर्द और मोमिन औरत के लिए यह जायज़ नहीं कि जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का फैसला कर दें, तो फिर उन्हें अपने उस मामले में कोई और राय रखने का अधिकार रहे। और जिसने अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी की, वह खुली गुमराही में पड़ गया।”
— (सूरह अल-अहज़ाब 33:36)
✨ इस आयत में बहुत बड़ा सबक है।
एक सच्चा मोमिन वही होता है जो अल्लाह और हज़रत मुहम्मद ﷺ के हुक्म को अपनी इच्छा और राय से ऊपर रखे। क्योंकि इंसान की सोच सीमित होती है, जबकि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरने वाला है।
जब इंसान अपने नफ़्स, समाज या लोगों की बात को दीन से ऊपर रखने लगता है, तो धीरे-धीरे वह सही रास्ते से दूर हो जाता है। लेकिन जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात को खुशी से मान लेता है, अल्लाह उसके दिल को हिदायत और सुकून से भर देता है।
🤲 दुआ है कि अल्लाह हमें अपनी और अपने रसूल ﷺ की पूरी फरमाबरदारी करने वाला बनाए और हर तरह की गुमराही से बचाए। आमीन।
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